सप्ताह भर में भाजपा को दूसरा झटका, रनिपुर सहकारी समिति पर भी टीएमसी का कब्जा
कोलकाता। हाई-प्रोफाइल विधानसभा क्षेत्र नंदीग्राम में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के इस गढ़ में तृणमूल ने सात दिनों के भीतर भाजपा को लगातार दूसरा बड़ा झटका दिया है। अमदाबाद सहकारी समिति के बाद अब रनिपुर सहकारी समिति के चुनाव में भी तृणमूल ने प्रचंड जीत दर्ज की है। रविवार देर शाम नतीजे घोषित होते ही पूरे इलाके में तृणमूल समर्थकों ने हरे अबीर के साथ जश्न मनाया और जमकर नारेबाजी की। रनिपुर सहकारी समिति की कुल 45 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी। चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो 5 सीटों पर टीएमसी के उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। शेष 40 सीटों पर भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ा संघर्ष देखा गया। मतगणना के बाद तृणमूल ने कुल 27 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि भाजपा को मात्र 18 सीटों से संतोष करना पड़ा। पार्टी नेतृत्व इस जीत को 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल मान रहा है। स्थानीय नेताओं का दावा है कि इस जीत के पीछे तृणमूल के सर्वभारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की 'सेवाश्रयÓ पहल का बड़ा हाथ है।
तृणमूल के तमलुक संगठनात्मक जिला के अध्यक्ष सुजीत राय ने कहा कि अमदाबाद-2 ग्राम पंचायत भाजपा का मजबूत इलाका रहा है, यहाँ तक कि लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने यहाँ से लीड ली थी। लेकिन अब जनता का मूड बदल गया है। यह सामान्य चुनाव से भी बड़ी जीत है क्योंकि लोगों ने सेवाश्रय के माध्यम से मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं और विकास पर मुहर लगाई है। रविवार को जब मतदान की प्रक्रिया चल रही थी, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी पड़ोसी इलाके हरिपुर में मौजूद थे। तृणमूल ने आरोप लगाया कि वे वहीं से चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की रणनीति बना रहे थे। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम बताया।
भाजपा नेता प्रलय पाल ने तंज कसते हुए कहा कि जिस इलाके में टीएमसी जश्न मना रही है, वह अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है। वहां 18 सीटें जीतना भाजपा के लिए नैतिक जीत के समान है। जीत की खबर के बीच हिंसा का काला साया भी मंडराता रहा। शनिवार रात से ही रनिपुर में तनाव का माहौल था। दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 12 कार्यकर्ता घायल हुए हैं। तृणमूल ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित उपद्रवियों ने उनके उम्मीदवारों के घरों में तोडफ़ोड़ की, जबकि भाजपा ने इसे तृणमूल की डराने-धमकाने वाली राजनीति करार दिया है। मतगणना के दौरान नंदीग्राम के सेवाश्रय शिविर में भी भारी उत्सुकता देखी गई। दोपहर के वक्त जब एक अफवाह उड़ी कि भाजपा 30 सीटें जीत रही है, तो शिविर में सन्नाटा पसर गया था। लेकिन शाम होते ही जैसे ही 27-18 का वास्तविक आंकड़ा सामने आया, टीएमसी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई।